कृष्ण भगवान् के वो रूप जिनके बारे में नहीं पता किसी को

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कृष्ण भगवान् के वो रूप जिनके बारे में नहीं पता किसी को

हेल्लो दोस्तों जैसे की सभी जानते है जन्माष्टमी आने वाली है तो भगवान् कृष्ण के बारे में क्यों न पहले से ही थोड़ी अधिक जानकारी ली जाये ताकि हम जन्माष्टमी अच्छे से बना सके।

जन्माष्टमी

भगवान् श्री कृष्णा मित्रो ,भगवान श्री कृष्ण जी के बारे में आप जितना भी जानिए आपको कम ही लगेगा देवी-देवताओं मध्य श्री कृष्ण जी का दर्जा सबसे अलग है हिंदू धर्म में अगर भगवान के किसी अवतार के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा हुई है तो वो श्री कृष्ण जी ही हैं।

भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन काल में अनेक लीलाएं रची जो अत्यन्त अद्धुत एवं आश्चर्यचकित करने वाली थी इसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण के संबंध में भी अनेक ऐसे पहलू है जो बेहद रोचक और अनोखे है आइये जाने उनके जीवन से जुडी सात अद्भुत बातो को भगवान श्री कृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार हैं ।

•  भगवान श्री कृष्ण जी को 108 नामो से जाना जाता है और मशहूर नामों में से कुछ इस प्रकार हैं – रणछोर, ‘गोविंद’, वासुदेव,गोपाल, घनश्याम, गिरधारी, मोहन, बाँके बिहारी, बनवारी, चक्रधर, देवकी नंदन, हरि आदि।

• भगवान् श्री कॄष्ण जी के धनुष का नाम ‘सारंग’ था उनके खड्ग का नाम ‘नंदक’, गदा का नाम ‘कौमौदकी’ और शंख का नाम ‘पांचजञ्य’ था तथा उनके के पास जो रथ था उसका नाम ‘जैत्र’ दूसरे का नाम ‘गरुढ़ध्वज’ था उनके सारथी का नाम दारुक था और उनके अश्वों का नाम शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक था।

• श्री कृष्ण जी कृष्ण के बारे में अक्सर यह कहां जाता है कि उनकी 16 हजार पटरानियां थी। लेकिन यह तथ्‍य गलत है उनकी मात्र 8 पत्नियां थीं रुक्‍मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा कृष्ण की जिन 16 हजार पटरानियों के बारे में कहा जाता है दरअसल वे सभी भौमासर जिसे नरकासुर भी कहते हैं उसके यहां बंधक बनाई गई महिलाएं थीं जिनको श्रीकृष्‍ण मुक्त कराया था ये महिलाएं किसी की मां थी, किसी की बहिन तो किसी की पत्नियां थी जिनको भौमासुर अपहरण करके ले गया था।

•  श्री कृष्ण जी के साथ भले ही राधा का नाम हमेशा लिया जाता हो लेकिन क्या आप जानते हैं दोस्तों कि किसी भी धर्मग्रंथ में राधा का जिक्र तक नहीं

महाभारत या श्रीमद भगवत गीता दोनों में से किसी भी धर्मग्रंथ में उनका नाम नहीं लिया गया है जयदेव ने पहली बार राधा का जिक्र किया था और उसके बाद से श्री कृष्ण के साथ राधा का नाम जुड़ा हुआ है।

 • भगवान श्रीकृष्ण जी  पूर्ण अवतार हैं, और दूसरे जितने अवतार हैं, वे भगवान के अंशमात्र होते हैं परन्तु भगवान श्रीकृष्ण स्वयं परिपूर्णतम हैं इसीलिए कहा गया है–कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।’ श्रीकृष्ण को पूर्णावतार या स्वयं-भगवान का पूर्ण आविर्भाव कहते हैं।

• भगवान् श्री कृष्ण जी ने कलारिपट्टू की नींव रखी जो बाद में बोधिधर्मन से होते हुए आधुनिक मार्शल आर्ट में विकसित हुई।
कृष्ण भगवान् के ये आठ रूप बहुत ही प्यारे थे आज अपने भी जान लिया भगवान् कृष्ण के इन रूप के बारे में।
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