जलमहल जयपुर इतिहास

जलमहल जयपुर इतिहास

जल महल राजस्थान के जयपुर में मानसागर झील के मध्य ऐतिहासिक प्रसिद्ध महल है अरावली पहाड़ो के गर्भ में झीलों के बीचों बीच होने के कारण इसको ‘आई बॉल’ भी कहा जाता है जयसिंह द्वारा निर्मित यहाँ महल मध्यकालीन महलो की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्‍त दुमंजिला और वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है यहाँ की नर्सरी में 80,000 से भी अधिक पेड़ पौधे लगे हुए है यहाँ राजस्थान के सबसे ऊंचे पेड़ पाए जाते हैं।

Jal Mahal Jaipur History In Hindi

जल महल एक 266 पुरानी इमारत है जिसे 1750 में बनवाया गया।

इतिहास

जयपुर आमेर मार्ग मानसागर झील के बीच स्थित इस महल का निर्माण सवाई जयसिंह ने यज्ञ के बाद अपनों रानियों और पंडितो के साथ स्नान करने के लिए करवाया था इसके निर्माण से पहले जयपुर के जयसिंह ने जलापूर्ति गभवती नदी पर पर बाँध बनवा कर मानसागर झील का निर्माण किया।

इसका निर्माण 1711 में हुआ था इसके लिए राजपूत की नोकाओ से मदद ली गयी राजा इसे अपने खास उत्सव् के लिए प्रयोग में लाते थे राजा अपनी रानियों के साथ यहाँ समय बिताते थे।

पारंपरिक वृन्दावन के नाविकों ने राजपूत स्टाइल में लकड़ी की नाव बनायी महल के रास्तों को भी सजाया गया अगर आप थोड़ा और आगे जाओगे तो वह से आपको चमेली बाग भी दिखाई देगा जिसकी खुशुब आपके मन को मोह लेगी सरोवर के आगे आपको पर्वत देखने को मिलेंगे उसके आगे आपको ऐतिहासिक मंदिर और लाल किले बने हुए हैं।

दूसरी तरफ आपको गुलाबी शहर जयपुर देखने को मिलेगा।

जल महल में सबसे खास खुद सरोवर ही है सरोवर में जमा कचरा को निकालने के लिए तथा सरोवर के जल को शुद्ध करने के लिए वाटर सिस्टम भी लगाया गया है इसमें आपको अलग अलग तरह के पक्षी देखने को मिलेंगे।

अभी जहा पर सरोवर है उस जगह पर को उपयोग करने के लिए वह के पानी को इकठ्ठा करने के लिए किया जाता था वह पर पानी का अकाल पड़ा हुआ था तभी आमेर के राजा ने एक डैम बनाने का काम शुरू किया ताकि बर्बाद पानी को इकठ्ठा किया जा सके तभी आमेर से और अमागढ़ पर्वत से पानी इकठ्ठा किया जाने लगा।

कुछ समय बाद इस डैम को पत्थरो का बनवाया गया यहां डैम 300 मीटर लंबा और 28.5-34.5  मीटर गहरा है पानी के बहाने के लिए 3 गेट बनवाये गए ताकि जब लोगो को खेती के लिए जरुरत पड़ने पर पानी का उपयोग हो सके उसके बाद राजस्थान के शासन ने उसके बाद उसकी बार बार मरम्मत भी कराई।

 

Jal Mahal Jaipur History In Hindi

 

18 वीं शताब्दी में आमेर के जयसिंह ने पुनर्निर्माण कराया।

उसके बाद वह पर बहुत सी इमारते बनी जैसे की आमेर किला ,जयगढ़ किला वंदावन घाटी ये सभी राजस्थान की आर्कषण इमारतें बनी।

महल की विशेषता

* इस महल की सबसे खास बात यहाँ पर गर्मी नहीं लगती क्योकि इसके कई तल पानी के अंदर बनाये गए है।

* यहाँ से खूबसूरत झील का नज़ारा भी देखा जाता है।

* जयसिंह ने जयपुर की जलापूर्ति हेतु गभा वती नदी और बाँध बनवा कर मानसागर झील का निर्माण कराया।

* जयपुर आमेर मार्ग पर मानसागर झील पर स्तिथ इस महल का निर्माण जयसिंह ने यज्ञ के बाद अपने पंडितो के साथ और रानियों के साथ स्नान के लिए करवाया था।

* इसके ऊपर मंज़िल की चारों कोनों पर बुर्जो की छतरियाँ व बीच की बरादरिया, संगमरमर के स्‍तम्‍भों पर आधारित हैं।

नर्सरी

जल महल की नर्सरी में एक लाख से भी अधिक पेड़ लगे हुए हैं ये पेड़ यहाँ के प्रदूषण को हटाता है जल महल न आपकी थकान दूर करता है आपकी उम्र में भी इजाफा करता है यूँ तो जल महल की नर्सरी बहुत पुरानी है फिर भी इस नर्सरी में 50 माली पेड़ों की देखभाल करते है इस नर्सरी की खास बात ये है यहाँ पर 150 साल पुराने पेड़ है उनको ट्रांसप्‍लांट करके नया जीवन दिया जाता हैं।

ऊँचे पेड़ वाली नर्सरी

यहाँ पर राजस्थान के सबसे ऊंचे पेड़ पाये जाते है जल महल की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए इस नर्सरी को बनवाया गया हैं यहाँ पेड़ 1 लाख से भी अधिक है।

 

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डीग के राजभवन

जलमहल के प्रशिद्ध डीग के ये भवन जाट राजा शासक सूरजमल ( 1756 – 63 ई० ) तथा जवाहर सिंह ( 1764 – 68 ई ०) के द्वारा बनवाये गए थे भवनों के इस परिसर में सावन और भादो दीघाओ सहित गोपाल भवन ,सूरज भवन ,हरदेव भवन दो भवन सरोवर स्तिथ है।

इनकी बनावट में मूलतः सीधे शहतीरों वाली स्तिथ शैली है तथपि कुछ उदाहरण में चापाकार शैली का प्रयोग किया है सजावटी स्तम्भो पर आधारित मेहराब , बड़े आकार के कक्ष ,संमतल ,छतें ,बंगाल की झोपड़ीनुमा छत वाली दीघयु और अध्वतकार त्रिफलरिय शक्वाकर शीष वाले मेहराब आदि इनकी विशेषता है ।

गोपाल सागर के दूसरी और स्तिथ कच्चा बाग वस्तु राजकीय उद्यान था इस समय में गोपाल भवन में यहाँ के शासकों द्वारा हर वास्तु को प्रदशित किया है यहाँ महल अपने रंगीन फव्वारों के लिए अधिक प्रसिद्ध है।

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Kiran Kashyap

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