एकादशी के दिन क्यों नहीं खाना चाहिए चावल

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हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल में 24 एकादशी आती है जबकि अधिक मास लगने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है और ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए इसके अलावा जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रखते हैं उनके लिए भी चावल खाना वर्जित माना गया है क्योंकि चावल ना खाना एकादशी के ही नियमों में शामिल है।

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अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाना चाहिए तो चलिए हम आपको बताते हैं पुरानी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से प्राणी रेंगने वाले जीव में जन्म पाता है किंतु द्वादशी को चावल खाने से मुक्ति भी मिल जाती है वैसे तो प्राचीन कथा के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया था और उनका अंश पृथ्वी में समा गया और बाद में ऐसा माना गया कि चावल और जौ के रूप में ही महर्षि मेधा उत्पन्न हुए।

इसलिए चावल और जौ को शास्त्रों में भी एकादशी के दिन खाने से मना किया गया है आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया था उस दिन एकादशी तिथि थी इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है इसके अलावा एक ऐसी भी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस व रक्त का सेवन करने के समान है।

चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे व्यक्ति का मन विचलित और चंचल हो जाता है मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा उत्पन्न हो सकती है इसलिए एकादशी व्रत में चावल खाना मना है।

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