अमित शाह का ख़त्म होगा कार्यालय हो सकता है अमित शाह के बाद

देश में आगामी लोकसभा चुनाव होने में मात्र 2 से 3 महीनों का ही वक्त बाकी रह गया है ऐसे में सभी राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटे हुए हैं अमित शाह के नेतृत्व में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

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अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का चाणक्य माना जाता है शाह की गिनती भाजपा के सबसे सफल अध्यक्षों में की जाती है अमित शाह के नेतृत्व में ही वर्ष 2014 के पश्चात भाजपा ने देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के जीतने पर तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को मोदी सरकार में गृह मंत्री बनाया गया था। ऐसे में राजनाथ सिंह के कार्यकाल को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाने वाले अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। लगभग 2 वर्षों तक कार्यकारी अध्यक्ष रहने के बाद एक बार फिर अमित शाह को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए चुने गए थे राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अमित शाह का कार्यकाल 26 जनवरी 2019 को समाप्त हो रहा है।

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव के साथ ही साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की चुनौती भी है भाजपा के आंतरिक संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार ही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष रह सकता है इस स्थिति में अमित शाह को पुन: भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी को अपने संविधान में संशोधन करना होगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में भाजपा के आंतरिक सूत्रों द्वारा यह बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव तक अमित शाह के कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है जहां तक बात भारतीय जनता पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की है तो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम इस पद की रेस में आगे बताया जा रहा है।

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