रामायण के कुछ ऐसे रहस्य जिनको कोई नही जानता, जरूर पढे ये खबर

दोस्तों बहुत ही कम लोग जानते हैं कि श्री रामचरित्रमानस और रामायण में कुछ कुछ बातें बिल्कुल अलग अलग हैं। जबकि कुछ बातें ऐसी है जिनका वर्णन केवल बाल्मीकि कृत रामायण मेंही ही लिखी गई है। दोस्तों भगवान श्रीराम को समर्पित मुख्यता दो ग्रंथ लिखे गए हैं। एक तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरित्रमानस और दूसरी बाल्मीकि कृत रामायण। इनके अलावा भी कुछ अन्य ग्रंथ भगवान राम पर लिखे गए हैं। आज हम आप लोगों को रामायण से जुड़े कुछ ऐसे लड़के के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे शायद आप लोगों को मालूम नहीं होगा।

बता दें दोस्तों महाकवि तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरित्रमानस में यह वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीराम ने सीता से विवाह करने के लिए उनके स्वयंवर में शिव धनुष को उठाया और उसका प्रत्यंचा चढाने लगे तो प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह शिव धनुष टूट गया। जबकि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन ही नहीं है।

रावण जब विश्वविजय करने के लिए स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। जिसे देखकर रावण उस पर मोहित हो गया और अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण ने रंभा को पकड़ लिया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उन्होंने रावण को एक श्राप दे दिया। उन्होंने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसके सर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।

बाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण जब अपने पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था। तभी उसे एक सुंदर युवती दिखाई दी। उसका नाम वेदवती था। और वो भगवान श्री हरि विष्णु का तपस्या कर रही थी क्योंकि वह भगवान विष्णु को अपने पति रुप में पाना चाहती थी। रावण ने जब वेदवती को देखा तो वह उस पर मोहित हो गया। और वह वेदवती के बाल खींचकर उसे अपने साथ चलने के लिए कहा।तब उस तपस्विनी ने उसी क्षण अपने शरीर का त्याग कर दिया। और रावण को श्राप दे दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी।

बता दें वाल्मीकि रामायण के अनुसार जिस समय भगवान श्री राम वनवास गए थे। उस समय उनकी आयु 27 वर्ष की थी। भगवान राम के पिता राजा दशरथ श्रीराम को वनवाश नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन वे अपनी पत्नी के आगे वचनबद्ध थे।

रघुवंश में एक समय अनरण्य नाम के एक परम प्रतापी राजा हुए थे। जब लंकापति रावण विश्वविजय करने के लिए निकला था। तब उस का युद्ध राजा अनरण्य के साथ भी हुआ था। और उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई थी। लेकिन मरने से पहले राजा अनरण्य ने लंकापति रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा।

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