थायरॉइड होने पर मिलते है शरीर से यह संकेत जरूर पढ़ें

क्या आप जानते है आज के समय मे थायरॉइड की बीमारी बढ़ती ही जा रही है। थायरॉइड असल में हमारे गले के अगले हिस्से में पायी जाने वाली एक ग्रंथि है जो शरीर की कई ज़रूरी प्रक्रियाओं और गतिविधियों को नियंत्रित करती है। यह ग्रंथि भोजन को ऊर्जा में बदलने के अलावा थायरोक्सिन हॉर्मोन के निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य करती है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि ये हॉर्मोन हमारी सांस , ह्रदय गति , पाचन तंत्र और शरीर के तापमान को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसलिए इस ग्रंथि में कोई भी तकलीफ हो जाए तो हमारे शरीर को बेहद नुक्सान पहुँच सकता है।

गला

क्योंकि ये ग्रंथि हमारे गले में ही पायी जाती है तो हमारे गले को ही सबसे पहले और सबसे ज़्यादा नुक्सान पहुँचता है थायरॉइड ग्रंथि में प्रॉब्लम के कारण गले में सूजन आ जाती है या फिर कई बार गाँठ भी बन जाती है , इससे खाने पीने में भी परेशानी होने लगती है। गले के संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से उचित इलाज और दवाइयां शुरू कर देनी चाहिए।

आँखें

थायरॉइड ग्रंथि से जुडी समस्याएं आँखों पर भी असर करती हैं क्योंकि थायरॉइड असंतुलन के कारण रेटिना की कार्य क्षमता प्रभावित होती है और वो ठीक से काम नहीं कर पाता। आँखों में जलन रहने लगती है और आँखों को नुक्सान भी पहुँचता है। कभी कभी तो समस्या इतनी बढ़ जाती है कि आँखों से धुंधला दिखने लगता है।

महिलाओं में बच्चेदानी

महिलाओं में होने वाली थायरॉइड की समस्या उनकी बच्चेदानी को काफी नुक्सान पहुंचाती है क्योंकि थायरॉइड असंतुलन के कारण बच्चेदानी में संकुचन की समस्या उत्पन्न हो जाती है जो बच्चेदानी की परत को कमज़ोर करती जाती है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को गर्भ-धारण में बहुत मुश्किल होती है।

दिमाग

थायरॉइड ग्रंथि का सुचारु रूप से काम न करना हमारे दिमाग पर भी असर डालता है क्योंकि थायरॉइड असंतुलन के कारण दिमाग का न्यूरोट्रांसमिटर ठीक ढंग से काम नहीं कर पाता और व्यक्ति तनाव और डिप्रेशन का शिकार होने लगता है। तनाव और अवसाद के कारण हमेशा एक चिड़चिड़ापन रहने लगता है जिससे और भी तकलीफें जैसे भूख न लगना या ज़्यादा लगना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

क्या करें थायरॉइड के रोगी

किसी भी व्यक्ति , जो थायरॉइड ग्रंथि की तकलीफ से गुज़र रहा है , के लिए दो बातें सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं – एक तो नियमित रूप से बिना किसी आलस के प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक करना और दूसरा आयोडीन युक्त भोजन खाना। इसके अलावा नियमित रूप से थायरॉइड लेवल की जांच और सही समय पर, नियमित रूप से ; डॉक्टर द्वारा दी गयीं दवाइयां खाना भी बहुत जरूरी है।

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